Ya Wasiu (या वासिउ) – अल्लाह तआला के नाम की फ़ज़ीलत

AL-WAASI’ (अल वासिऊ) कुशादगी देने वाला

वासिउ का मतलब होता है बरकत और कुशादगी वाला है, चूंकि अल्लाह की बरकत की कोई इन्तिहा नहीं, इस लिए उसे वासिउ कहा जाता है, क्योंकि इसका इल्म बहुत फैला हुआ है ।

अल्लाह की बादशाहत लामहद्वुद (बिइन्तिहा ) है, उसके गिना (मालदारी) की कोई हद नहीं, उसकी ज़ात के पास सब कुछ है । उसकी हुकूमत कभी ने ख़त्म होने वाली है उसकी नेअमतें बे पनाह हैं । उसके इनामो इकराम लातादाद हैं ।

उसका एहसान सब एहसानों से बड़ा है। उसका दिया हुआ हर एक के लिए एक जैसा है । उसके वजूद की इन्तिहा नहीं । उसकी हुकूमत सब पर है ! वह अपने हुस्न और जमाल में तन्हा है।

वह अपने जलाल में सबसे बढ़ कर और बुजुर्गी वाला औैर सबसे आला बुलन्द है । वह अपने कमालाते कूदरत में इतना बड़ा है कि उसका कोई किनारा नहीं । वह अपने नूर इतनी वुसअत रखता है कि इन्सानी अक्ल वहां तक पहुंच नहीं सकती ।

इसका मतलब यह है कि वह अपनी ज़ात और सिफात में हर लिहाज़ से बेपनाह वुसअत्त लिए हुए है | इसी लिए वह अपनी इस सिफ़त की बिना पर “या वासिउ” कहलाता है ।

एक और कौल के मुताबिक वासिअ हर शय (चीज़) को देखने वाला है, यानी जिसका इल्म हर शय को देखता हो । गर्ज़ यह है कि कोई शय उसके इल्म से बाहर न हो ।

  • बडे रिज़्क़ का वज़ीफा

“या वासिउ” बड़े रिज़्क़ के लिए बहुत फाइदामन्द है। लिहाजा बड़े रिज़्क़ की नीयत से इसे ग्यारह हज़ार बार रोजाना तीन साल तक पढ़ें ।

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रिज़्क़ और दौलत में बेपनाह इजाफा होगा । इसे पढ़ने वाला दीन और दुनिया की दौलत से माला माल हों जाएगा।

कभी परीशान और मोहताज न होगा । एक और आमिल का क़ौल है कि रिज़्क की ज़्यादती के लिए इस नाम को पांच हज़ार बार इशा की नमाज़ के ब्वाद पढ़ना बहुत फाइदामन्द है ।

  • तस्खीर (अपना बनाना) की खुसुसी कुवत का हुसुल

इस नाम मुबारक को बहुत ज़्यादा पढ़ने वाले को अल्लाह तअला दिलों को तस्खीर (अपना बनाना) करने की खुसुसी ताकत से और अपने फजलो करम के नूरों से नवाजता है।

एक आमिल का कौल है कि जो शख्स इसे 70 दिन तक सत्तर हज़ार बार रोज़ाना पढ़ ले तो यह मखलूक को अपना बनाने में बेहद कामयाब हो जाएगा । दूर दूर तक उसकी इज्जत और शोहरत हो जाएगी।

जिसकी तरफ नज़र उठाकर देखेगा वही फ़रमाबरदार हो जाएगा । अमीर और साहिबे इकतिदार लोगों में इज्जत की नजर से देखा जाएगा, यानी तस्खीर मखलूक के लिए यह नाम बढुत ही ला जवाब है।

  • रोज़ी की तलाश सें मुश्किलात का दूर होना
halal rozi

अगर किसी को हलाल रोज़ी तलाशने में किसी वजह से कोई मश्किल आ रही हो तो “Ya Wasiu” के विर्द को रूटीन बना लिया जाए तो अल्लाह तआला आमदनी में भी इजाफा कर देता है और मुश्किल भी दूर कर देता है और इस नाम मुबारक का विर्द करने वाले को अल्लाह तअला रिज़्क़ की तंगी से बचाए रखता है उसकी रोजी में बरक़त अता फुरमाता है और उसके जाहिरी व बातिनी दर्जे भी बुलन्द फ्रमा देता है।

  • इल्म हासिल करने में आसानी
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अगर कोई स्टूडेन्ट इल्म हासिल करने की कोशिश को जारी रखना चाहता हो, लेकिन उस में कोई रुकावट पैदा हो रही हो तो उसे चाहिए कि इस नाम का रोजाना 137 मर्तबा पढ़ने का रूटीन बना ले ।

इन्शा अल्लाह उसका कोई जरिया बन जाएगा औ वह अपनी तालीम को जारी रख सकेगा । एक आमिल का कौल है कि अगर किसी बच्चे का जहन पढ़ाई में नहीं लगता हो तो इस नाम को 1100 मर्तबा पढ़कर पानी पर दम करके पिलाएं । इन्शा अल्लाह उसका जहन तेज हो जाएगा ।

Ya Majidu (या माजिदु) – अल्लाह तआला के नाम की फ़ज़ीलत

  • इतमीनान कल्बी का हुसुल

हर किस्म की परीशानी को दूर करने और दिली आराम हासिल करने के लिए नमाज ए ज़ुहर के बाद 111 बार यह नाम मुबारक पढ़ें पहले व आखिर तीन तीन मर्तबा दरूद पाक पढ़ लें । अल्लाह तआला के फज़लो करम से तबीअत में निखार पैदा होगा और सुकून की दौलत नसीब होगी ।

  • दुकान की तरक्की का अमल
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अगर कोई शख्स अपनी दुकान का कारोबार बढ़ाना चाहे तो उसे चाहिए कि बाद जुमा की नमाज़ कुछ आदमी इकहट्टे करे और 31250 मर्तबा मिलकर पढ़ें और चार जुमे तक इस तरह पढ़ाई करें । उसके बाद कारोबार को बढ़ाने के लिए मेहनत करें । इन्शा अल्लाह कारोबार में तरक्की होगी ।

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