Ya Kareemu (या करीमु) Benefits – अल्लाह तआला के नाम की फ़ज़ीलत

Al-Kareem (अल-करीम) बेइंतिहा करम करने वाला

अल्लाह करीम है क्योंकि उससे जो मांगता है उसे अता कर देता है। जितना मांगता है उतना ही दे देता है । मांगने से भी देता है और बगैर मांगे भी देता है ।

हर किसी को देता है। हर वक्त देता है । किसी को उसके फितरी हक से महरूम नहीं रखता । उसकी अता के ख़ज़ाने भरपूर हैं । कभी खत्म नहीं होंगे । उसके दर से कोई खाली नहीं लौटता ।

बार बार मांगने से कभी नहीं उकताता । वन्दों की कोताहियों को देखते हुए भी दरगुज़र कर देता है यानी उसके करम की कोई हद नहीं । इसलिए हर वक्‍त अल्लाह ताला से करम की गुजारिश करते रहना जरूरी है ।

एक और कौल के मुताबिक इसका मतलब है वह ज़ात जो इन्तिकाम पर कदरत रखते हुए मुआफ कर दे, वादा पूरा करे, हिसाब न करे यह पसन्द न करे कि हाजतमन्द अपनी हाज़त किसी और के पास ले जाए ।

इस इस्मे पाक ‘Ya Kareemu’ के कुछ (Benefits) फाइदे इस तरह हैं-

जो शख्स इस नाम को कसरत से पढता है। अल्लाह तआला उसे नेक अखलाक और नेक मिजाज कर देता है। बस करीम मुतलक़ अल्लाह तआला ही है ।

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बा इज्ज़त बनना:

जो शख्स इस नाम की ज़िन्दगी भर नौकरी करे यानी पढ़ता रहे । अल्लाह उसे एक न एक दिन इज़्ज़तदार और मुकर्रम फ्रमा देगा ।

लिहाज़ा ऐसा शख्स जो यह महसूस करता हों कि लोग उसकी इज़्ज़त नहीं करते, बल्कि छोटी छोटी बातों पर उसे हर मकाम पर बेइज्ज़त कर दिया जाता है अगर वह यह वज़ीफ़ा 528 बार हर फर्ज नमाज़ के बाद पढ़ना शुरू कर दे ।

अल्लाह उसे हमेशा के लिए दुसरो की नजर में बाइज़्ज़त कर देगा और जो उसकी बेइज़्ज़ती करने की कोशिश करेगा वह ज़लील होगा ।

नेक सुलूक से पेश आना:

जो कोई यह चाहता हो कि लोग उसके साथ नेक सुलूक से पेश आए उसे चाहिए कि वह हर फर्ज नमाज़ को अदा करने के बाद 100 बार यह नाम मुबारक पढ़े, इन्शा अल्लाह जिधर भी जाएगा लोगों के दिलों में अपने लिए इज़्ज़त ही इज्जत पाएंगे।

दुआ का क़ुबूल होना:

अल्लाह के नेक बन्दों का कहना है कि जो शख्स इस नाम को सुबह शाम कसरत से पढ़ने का रूटीन बना ले अल्लाह तआला उसकी ज़बान में दुआ के कुबूल होने की तासीर पैदा-कर देता है और उसकी दुआएं क़ुबूल होने लगती हैं । जिस चीज़ की वह दुआ करता है ।

अल्लाह तआला उसे पूरा करता है, यानी अल्लाह तआला हर लिहाज से उसे अपनी रहमत और करम का हकदार बना देता है।

हर ज़रूरत का पुरा होना:

अगर किसी शख्स की कोई ऐसी ज़रूरत हो जो पूरी होती नज़र न आए उसे चाहिए कि इस नाम “या करीमु” को रोज़ाना 11000 बार पढ़ना शुरू करे और सात महीने तक यह अमल जारी रखे ।

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इन्शा अल्लाह उसकी जो भी ज़रूरत होगी वह पूरी हो जाएगी, शर्त यह है कि पक्का यकीन हों ।

तंगदस्ती और गरीबी का खात्मा:

अगर कोई शख्स तंगदस्त और परीशान हाल रहता हो तो उसे चाहिए कि यकीन के साथ सुबह उठकर नमाज फजर पढ़े और एक घंटे तक इस नाम “या करीमु” का विर्द करे और फिर रात को सोते वक्त इशा की नमाज पढ़े और “या करीमु” का विर्द करें ।

इन्शा अल्लाह खुदा के फज़ल से उसके रिज्क के दरवाज़े खुल जाएंगे और वह हर तरह से मालामाल हो जाएगा और दुनिया की हसद भरी नजरों से महफूज रहेगा ।

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सख़ावत का जज्बा पैदा होना:

जो शख्स फजर की नमाज के बाद एक सौ इक्कीस बार “या करीमु” का विर्द करके दुआ करे तो अल्लाह तआला उसके दिल में लुत्फो करम और सख़ावत का जज्बा पैदा कर देता है ।

अगर कोई शख्स इस नाम को 270 बार रोजाना दिन या रात में पढ़ेगा तो सख़ावत उसकी खूबी बन जाएगी ।

अगर रात को बिस्तर पर सोते वक्त पढ़ेगा तो फ़रिश्ते उसके लिए दुआ करेंगे और कहेंगे अल्लाह तुम्हें मुकर्रम और इज्जतदार बना दे ।

कंजूसी का इलाज:

कुछ लोगों में पैदाईशी तौर पर कंजूसी की आदत होती है, यानी वह अल्लाह की राह में देने का नाम नहीं लेते । यह नाम “या करीमु” इस किस्म की आदत खत्म करने के लिए बहुत असर रखता है ।

इसलिए अगर किसी की कंजूसी की ही आदत सही करनी हो तो इस नाम को एक हज़ार बार पढ़कर पानी दम करके उसे पिलाएं। तीन दिन तक इसी तरह करें । इन्शा अल्लाह कंजूसी की आदत खत्म हो जाएगी ।

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अल्लाह तआला से नेअमतों का हुसुल:

मशहूर आलिम अबू अब्दुल्ला शम्सुद्दीन (रह0), मुहम्म्द बिन याकूब कूफी (रह0) कहते हैं कि इस नाम का कसरत से ज़िक्र करने वाला अपने माल और कुल अहवाल में इज़ाफ़ा पाता है और अल्लाह तआला उसको जाहिरी व बातिनी नेअमतें अता फ़रमाता है ।

फाइदा पहुंचाने में “या करीमु” में यह इस्मे पाक इस्मे आजम का दर्जा रखता है।

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