क्या उर्दू विदेशी भाषा है? आधुनिक मिथकों में से एक मिथक

उर्दू भाषा को विकसित करने के लिए जो कदम उठाये जाते हैं उन्हें अक्सर विदेशी भाषा को बढ़ावा देना कहा जाता है। यह आधुनिक मिथकों में से एक मिथक है ।

हो सकता है कि सिंधु और गंगा के बीच के मैदानी क्षेत्र में उर्दू भारतीय मुसलमानों की पहचान का आवश्यक घटक रहा हो । लेकिन यह पूर्ण रूप से भारतीय आर्य भाषा है जिसका व्याकरण संस्कृत की तरह है।

उर्दू का विकास मुगल भारत के सैन्य छावनियों में हुआ जहां अनेक नस्लीय समूह आपस में मिलते-जुलते थे और वे आपस में हिन्दी, संस्कृत, ब्रजभाषा, प्राकृत और पाली की विभिन्न बोलियाँ बोलते थे ।

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न तो भारत के सभी मुसलमान उर्दू बोलते हैं और न ही इसका प्रयोग करने वाले (या उन्होंने अतीत में इसमें योगदान किया है) सब मुसलमान हैं ।

उर्दू की साहित्यिक विरासत अपने साथ धर्मनिरपेक्ष पहचान रखती है जिसमें अनेक हिन्दू कवियों, लेखकों, कहानीकारों और निबन्धकारों ने बहुत अधिक योगदान दिया है ।

भागवत गीता के उर्दू अनुवाद किसी भी भारतीय भाषा में इसके अनुवादों से अधिक हैं । अनेक बड़े उर्दू लेखक जैसे आनन्द नारायण मुल्ला, मालिक राम, कृष्णचन्द्र, विशेष्वर प्रदीप, मनोरमा दीवान, प्रेमचंद, रघुपति सहाय फिराक गोरखपुरी, बृज नारायण चकबस्त और गोपीचन्द नारंग हिन्दू समुदाय से सम्बन्ध रखते हैं।

उर्दू का मध्य पूर्व के देशों और अरबों से कोई सम्बन्ध नहीं है । पाकिस्तान ने अवश्य राष्ट्रीय स्तर पर इसे कार्यालय की भाषा के रूप में अपनाया है लेकिन पाकिस्तान के सभी चार राज्यों में रहने वाले लोग अपनी अपनी क्षेत्रीय भाषाएं बोलते हैं अर्थात सिंधी, बलूची, पंजाबी और पश्तूनी ।

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इसी तरह पाकिस्तान की चार क्षेत्रीय भाषाओं में से एक भाषा सिन्धी, भारत की राष्ट्रीय भाषाओं में सम्मिलित है । यह एक दूसरे को संदेह की दृष्टि से देखने का कारण होने की बजाए हमारी समान विरासत का आपसी विस्तार है।

इसकी फारसी लिपि भी इसे विदेशी नहीं बनाती । तीन अन्य भारतीय भाषाएँ सिन्धी, पंजाबी और कश्मीरी भी फारसी लिपि प्रयोग करती हैं।

यदि आपको इस सम्बन्ध में किसी प्रमाण की आवश्यकता है तो भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए सौ के नोट को उलट कर विभिन्न भाषाओं की लिपियों को देखिए ।

सबसे पुरानी और बची हुई उर्दू पत्रिका जो 100 वर्ष से अधिक पुरानी है और जिसका नाम मस्ताना जोगी है। इसका स्वामी एक हिन्दू है, और इस समय सबसे अधिक पढ़ा जाने वाला उर्दू दैनिक राष्ट्रीय सहारा एक गैर मुस्लिम द्वारा संचालित प्रकाशन “सहारा समूह’ द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।

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