तलाक..तलाक..तलाक…जानिए मीडिया द्वारा भद्दा मज़ाक बना दिए गए तलाक की पूरी जानकारी

धर्मों में इस्लाम सबसे पहला धर्म है जिसमें विवाह और विवाह-विच्छेद (Divorce) का आसान और विस्तृत तरीका प्रस्तुत किया। इस्लाम के अनुसार, शादी एक पुरुष और स्त्री के बीच एक सामाजिक समझौते के द्वारा सम्पन्न होता है ।

स्त्री और पुरुष कुछ व्यक्तियों अर्थात गवाहों और काज़ी के सामने एक प्रण लेते हैं । दोनों पक्षों की ओर से एक-एक व्यक्ति विवाह का प्रस्ताव करता है।

दो व्यक्ति गवाह बनते हैं और समझौते को एक काज़ी लिखता है, पवित्र कुरान से कुछ आयतें पढ़ता है जिसे निकाह का खुतबा कहा जाता है।

फिर काज़ी दूल्हा और दुल्हन दोनों के हस्ताक्षर लेता है। इस प्रकार इस समझौते को दोनों पक्षों द्वारा स्वीकार किया जाता है और समारोह समाप्त हो जाता है।

तलाक किसे कहते है

यदि दोनों पक्ष यह देखें कि उन दोनों की प्रवृत्ति एक-दूसरे के प्रतिकूल है और साथ में प्यारे बच्चे होने के बावजूद वे एक साथ नहीं रह सकते तो इस्लाम ने इसमें निहित तथ्यों और मानव प्रकृति (Human Nature) के स्वभाव को समझा और अलगाव का प्रावधान रखा ।

अलगाव के लिए अधिक विस्तृत प्रक्रिया अपनाई जाती है । इस प्रक्रिया को “तलाक (Talaq)” कहा जाता है ।

divorce

इस्लाम, पुरुषों और स्त्रियों की व्यक्तिगत प्रवृत्ति की विविधता को स्वीकार करता है। यद्यपि निकाह उनको, पति और पत्नी के रूप में जोड़ देता है लेकिन उस सर्वशक्तिमान अल्लाह ने उनके अलगाव के लिए भी प्रावधान रखा है जो कि मानवता का रचयिता है ।

यदि यह प्रावधान न दिया गया होता तो ऐसे अनेक जोड़ों के लिए जीवन नरक बन जाता जो साधारण रूप से जीवन की गाड़ी एक साथ नहीं खींच सकते ।

पुरुष महिलाओं की हत्या करते या महिला विवाह में अनुकूलता न होने के कारण आत्महत्या कर लेती । इस्लाम निश्चित रूप से एक ऐसे पुरुष और एक स्त्री को एक साथ बाँधना नहीं चाहता जो एक साथ रहने से घृणा करते हैं और अपनी पसंद, स्वभाव और प्रकृति के बीच अनुकूलता लाने में असफल हो जाते हैं ।

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यही कारण है कि इस सम्बन्ध से बाहर निकालने का एक सम्मानजनक रास्ता उपलब्ध कराया गया है। इसी को तलाक कहा जाता है ।

तीन तलाक

किसी तरह इस सोच ने जड़ पकड़ लिया है कि एक मुस्लिम पुरुष अपनी पत्नी को केवल तीन बार तलाक कहकर ही तलाक दे सकता है।

अब इस प्रक्रिया के साथ बहुत सा मज़ाक सम्मिलित हो गया है। तलाक के सम्बन्ध में कुछ कम समझ मौलवियों ने कुछ फतवे दिए हैं कि यदि कोई फोन, मोबाइल या SMS सन्देश या ईमेल भेजकर तलाक देता है तो वह तलाक भी मान्य होता है।

इसमें और मसाला लगाने के लिए कुछ मौलवियों को उद्धृत किया जाता है कि वह इसकी वैधता की अनुमति देते हैं चाहे किसी ने नशे की हालत में या स्वप्न में भी तलाक शब्द कह दिया हो । यह कुछ बॉलीवुड फिल्मों के लिए भी एक रोचक सामग्री बन गया ।

takaq

इसी तरह यह भी सोचने योग्य है कि इस्लाम किस तरह एक ऐसे तलाक को वैध करार देगा जो नशे की हालत में दिया गया हो, हालांकि नशे की हालत में पढ़ी गयी नमाज स्वीकार्य नहीं होती ।

इसलिए इसमें सन्देह करना उपयुक्त होगा कि कुछ निहित स्वार्थ रखने वाले वर्ग इस्लाम और इसके पारिवारिक कानून के विरुद्ध इस तरह की भ्रांतियां फैला रहे हैं । कोई भी समझदार व्यक्ति ऐसी मान्यता को स्वीकार नहीं कर सकता ।

इस सिलसिले में कम से कम यह कहा जा सकता है कि मीडिया द्वारा यह खिलवाड़ पूर्ण रूप से शरारतपूर्ण है । पहली बात तो यह है कि मीडिया और समाचार-पत्रों में तलाक के जो समाचार प्रकाशित होते हैं उस सिलसिले में सच्चाई यह है कि मुस्लिम विवाह का परिणाम तलाक के रूप में कम ही होता है ।

दूसरा, यह बिल्कुल संभव है कि इस तरह के कुछ मामले उछाले जाते हों, ताकि टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट (TRP) को बढ़ाया जा सके और इसके लिए शरीयत और इसके प्रावधानों को बदनाम करने के लिए कुछ कम समझ मौलवियों से फतवा प्राप्त कर लिया जाए ।

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तीसरे हमारे लिए दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि कुछ मुसलमान गैर जिम्मेदाराना व्यवहार अपनाते हुए कम जानकारी के कारण या क्रोध के आवेश में तीन तलाक दे देते हैं और मुस्लिम महिला का जीवन बर्बाद कर देते हैं।

इससे इस्लाम की छवि को अत्यधिक क्षति पहुँचती है और इससे इस्लाम में तलाक की धारणा की आलोचना करने और इस्लाम को बुरा-भला कहने के लिए एक अच्छा बहाना मिल जाता है।

मुस्लिम पुरुषों द्वारा बुरी तरह प्रयोग

जो समुदाय अपने वैवाहिक बन्धन को किसी भी कीमत पर तोड़ने की अनुमति नहीं देते उनमें महिलाओं को डराया जाता है, प्रताड़ित किया जाता है और यहाँ तक कि उन्हें जला दिया जाता है। 

अब तलाक के प्रावधान का कुछ मुस्लिम पुरुषों द्वारा बुरी तरह प्रयोग किया जाता है और पिछले वर्षों में इस्लामी कानून की गलत व्याख्या ने इसके ग़लत ढंग से लागू करने और उसको वैध ठहराने को संभव बनाया है।

लेकिन सच्चाई यह है कि इस्लाम में तलाक अत्यन्त घृणित प्रावधान है हालांकि यह केवल प्रतिकूल विवाहों को समाप्त करने के लिए ही इस्लामी कानून में एक वैध प्रावधान है ।

कुरान तलाक की अनुमति देता है हालांकि पैगम्बर (सल्ल0) ने कहा है कि “सभी वैध कर्मों में अल्लाह तलाक से अधिक किसी चीज़ को नापसंद नहीं करता।”

कुरान में तलाक का वर्णन

कोई पति अपनी पत्नी को किस प्रकार तलाक दे इसका वर्णन कुरान में इस प्रकार किया गया हैः

“यदि तुम औरतों को तलाक दो और वह अपनी इद्दत पूरी कर ले तो फिर
या तो तुम अपनी पत्नी को सम्मान पूर्वक विदा कर दो या तुम उसे रख लो ।”

(कुरान, 2:231)

एक बार फिर यह आदेश दिया गया है किः

तलाक दो बार है। फिर सामान्य नियम के अनुसार (स्त्री को) रोक लिया जाए
या भले तरीके से विदा कर दिया जाए। और तुम्हारे लिए वैध नहीं है कि जो
कुछ तुम उन्हें दे चुके हो, उसमें से कुछ ले लो, सिवाय इस स्थिति के कि दोनों
को डर हो कि वे अल्लाह की (निर्धारित) सीमाओं पर कायम न रह सकेंगे ।

(कुरान , 2:229)

यदि उपरोक्त आयतों को सूरः निसा की 34वीं और 55वीं आयत के साथ मिलाकर पढ़ा जाए तो इससे सात चरणों पर आधारित तलाक की प्रक्रिया का पता चलता है।

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लेकिन किसी तरह इस प्रक्रिया को भुला दिया गया है और काज़ियों ने पति द्वारा अपने मुँह से कहे गए शब्द “तलाक” द्वारा विवाह को समाप्त करने को वैध कर लिया है।

जो लोग इस तरह तलाक देते हैं उनके बारे में पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल0) ने घोषणा की कि यह लोग अल्लाह के आदेशों के साथ खिलवाड़ करते हैं ।

जिस व्यक्ति ने इस तरह तलाक दिया था उसको पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल0) के साथी हजरत उमर (रजि0) ने दंड दिया था। 

खुला (Khula): महिलाओं का तलाक लेने का अधिकार

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यदि पति-पत्नी ऐसी परिस्थिति तक पहुँच जाएँ कि दोनों अपने विवाह-बन्धन को जारी न रखना चाहते हों, और पत्नी अपने पति से तलाक लेना चाहती हो तो इस्लाम उसे भी इसका अधिकार देता है।

यदि पति तलाक देने से इन्कार कर रहा हो तो एक मुस्लिम औरत तलाक लेने के लिए काज़ी के पास जा सकती है : लेकिन यह तलाक अचानक नहीं हो सकती; इसमें एक इद्दत (समयान्तरात्र या प्रतीक्षा का समय होना चाहिए)।

यह समय अंतराल उस समय तक रहता है जब पत्नी तीन मासिक धर्म पूरा कर लेती है, और यदि वह गर्भवती है तो प्रतीक्षा का यह समय प्रसव तक रहता है।

इस समय के दौरान उसे अपने पति से आर्थिक सहयोग प्राप्त करने का अधिकार है। प्रतीक्षा के इस समय को एक-दूसरे के बीच मेल-मिलाप के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है।

कुरान  पतियों को चेतावनी देता है

पति को एक अन्य चेतावनी यह दी गयी है कि उसे अपनी तलाक दी हुई पत्नी को किसी अन्य से विवाह करने में रुकावट नहीं बनना चाहिए। यही तुम्हारे लिए ज़्यादा बरकत वाला और सुधरा तरीका है और अल्लाह जानता है, तुम नहीं जानते ।

(कुरान, 2:232)

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