सूरह फातिहा हिंदी में – सूरह फातिहा का तर्जुमा

सूरह फातिहा
“Al-Fatihah”

कहाँ नाज़िल हुई:मक्का
आयतें:7
पारा:1

इसका सूरह का नाम अल-फातिहा इसके विषय के अनुकूल हैं, इसमें 7 आयतें हैं। फातिहा उस चीज़ को कहते हैं जिससे किसी विषय या पुस्तक या किसी वस्तु का उद्घाटन हो। दूसरे शब्दों में यूं समझें कि यह नाम भूमिका, प्राक्कथन के अर्थ में है। 

अवतरणकाल

यह हज़रत मुहम्मद (सल्ल0) के नबी होने के बिल्कुल प्रारम्भिक काल की सूरा है। बल्कि विश्वसनीय कथनों से मालूम होता है कि सबसे पहली पूर्ण सूरा जो मुहम्मद (सल्ल0) पर अवतरित हुई यही है। इससे पहले केवल कुछ विविध आयतें उतरीं थीं जो सूरह अलक, सूरह मुजम्मिल, सूरह मुदस्सिर आदि में सम्मिलित हैं।

सूरह फातिहा अरबी में

surah fatiha arabic image

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ

ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

مَـٰلِكِ يَوْمِ ٱلدِّينِ

إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَإِيَّاكَ نَسْتَعِينُ

ٱهْدِنَا ٱلصِّرَٰطَ ٱلْمُسْتَقِيمَ

صِرَٰطَ ٱلَّذِينَ أَنْعَمْتَ عَلَيْهِمْ غَيْرِ ٱلْمَغْضُوبِ عَلَيْهِمْ وَلَا ٱلضَّآلِّينَ

सूरह फातिहा हिंदी में

बिस्मिल्लाह हीर रहमान नीर रहिम

  1. अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन 
  2. अर्रहमानिर्रहीम
  3. मालिकि यौमिद्दीन
  4. इय्या-क न बुदु व इय्या-क नस्तीइन,
  5. इहदिनस्सिरातल्-मुस्तकीम
  6. सिरातल्लज़ी-न अन्अम्-त अलैहिम
  7.  गैरिल्-मग़जूबि अलैहिम् व लज्जॉल्लीन

सूरह फातिहा का तर्जुमा

अल्लाह के नाम से जो बड़ा ही मेहरबान और रहम करने वाला है।

  1. प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है जो सारे जहान का रब है।
  2. बड़ा ही मेहरबान और दया करने वाला है।
  3. बदला दिए जाने के दिन का मालिक है।
  4. हम तेरी ही बंदगी’ करते हैं और तुझी से मदद मांगते हैं।
  5. हमें सीधा मार्ग दिखा। 
  6. उन लोगों का मार्ग जो तेरे कृपापात्र हुए।
  7. जो प्रकोप के भागी नहीं हुए, जो भटके हुए नहीं हैं।
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