सूरह निसा (4)

सूरह निसा
“An-Nisa”

कहाँ नाज़िल हुई:मदीना
आयतें:176 verses
पारा:4-6

नाम रखने का कारण

इस सूरा का नाम निसा (औरतें) इसलिए रखा गया है कि इस सूरा में कई जगह यह शब्द प्रयुक्त हुआ है। तथा इस सूरत में विशेषकर औरतों से सम्बन्धित आदेश हैं।

अवतरणकाल

यह सूरा कई अभिभाषणों पर आधारित है जो संभवतः सन् 3 हिजरी के अंतिम समय से लेकर सन् 4 हिजरी के अंत के समय या सन् 5 हिजरी के आरंभिक काल तक विभिन्न समय में अवतरित हुए हैं।

यद्यपि यह सुनिश्चित करना मुश्किल है कि किस जगह से किस जगह तक की आयतें एक अभिभाषण के सिलसिले में अवतरित हुई थी और उनका ठीक अवतरण काल क्या है, लेकिन कुछ आदेश और घटनाओं की ओर कुछ संकेत ऐसे हैं जिनकी अवतरण तिथियां हमें उल्लेखों (रिवायतों) से मालूम हो जाती हैं। इसलिए उनकी मदद से हम इन विभिन्न अभिभाषणों की एक सरसरी हदबंदी कर सकते हैं जिनसे इन आदेशो और इशारो का सम्बन्ध है।

उदाहरणार्थ हम जानते हैं कि विरासत की तकसीम (वितरण) और अनाथों के अधिकारों से सम्बन्धित आदेश उहुद की लड़ाई के बाद अवतरित हुए थे, जब मुसलमानों के सत्तर आदमी शहीद हो गए। इस आधार पर हम अनुमान कर सकते हैं कि आरंभ से लेकर आयत 28 तक उसी समय अवतरित हुई होंगी। मदीना से बनू नज़ीर का बहिष्कार रबीउल अव्वल, सन् 4 हिजरी में हुआ। इसलिए अधिक संभावना इसकी है कि वह अभिभाषण इससे पहले किसी निकट के समय में ही अवतरित हुआ होगा जिसमें यहूदियों को अल्लाह की ओर से अंतिम चेतावनी दी गई है कि “ईमान ले आओ इससे पहले कि हम चेहरे बिगाड़ कर पीछे फेर दें।”

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पानी न मिलने की वजह से ‘तयम्मुम’ का आदेश बनी मुस्तलिक की लड़ाई के अवसर पर दिया गया था जो सन् 5 हिजरी में हुई। इसलिए वह अभिभाषण जिसमें तयम्मुम का उल्लेख है उसे इसी से मिले हुए समय का समझना चाहिए ।

पृष्ठभूमि

इस तरह समग्रतः सूरह का अवतरण काल जान लेने के पश्चात हमें उस समय के इतिहास पर एक दृष्टि डाल लेनी चाहिए ताकि सूरह  की विषय-वस्तु के समझने में उससे सहायता ली जा सके।

नबी (सल्ल0) के सामने उस समय जो काम था उसे तीन बड़े-बड़े भागों में विभक्त किया जा सकता है। एक, उस समय नव संगठित इस्लामी समाज का विकास जिसकी नींव हिजरत के साथ ही पवित्र नगर मदीना और उसके आस-पास में पड़ चुकी थी।

दूसरे, उस संघर्ष का मुकाबला जो अरब बहुदेववादी, यहूदी कबीलों और सुधार के विरोधी कपटाचारियों की शक्तियों के साथ पूरे ज़ोर के साथ चल रहा था। तीसरे, इस्लाम के आमंत्रण को इन अवरोधक शक्तियों की परवाह न करते हुए विस्तार देना। सर्वोच्च अल्लाह की ओर से इस अवसर पर जितने अभिभाषण अवतरित हुए वे सब इन्हीं तीन विभागों से सम्बद्ध हैं।

इस्लामी समाज के गठन के लिए सूरह बकराह में जो आदेश दिए गए थे, अब इस समाज को उससे अधिक की अपेक्षा थी, इसलिए इस सूरह निसा के इन अभिभाषणों में अधिक विस्तार के साथ बताया गया कि मुसलमान अपने सामाजिक जीवन को इस्लाम के तरीके पर किस प्रकार दुरुस्त करें। किताब वालों की नैतिक और धार्मिक नीति की समीक्षा करके मुसलमानों को सावधान किया गया कि अपने पूर्व के इन समुदायों के पद चिन्हों पर चलने से बचें। कपटाचारियों ने जिस प्रकार की नीति अपनाई थी उसकी आलोचना करके सच्ची ईमानदारी की अपेक्षाओं को स्पष्ट किया गया।

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बनाव और सुधार की विरोधी शक्तियों से संघर्ष चल रहा था। उहुद के युद्ध के पश्चात् उसकी सूरत और ज़्यादा नाजुक हो गई। इन परिस्थितियों में अल्लाह ने एक तरफ आदेशपूर्ण अभिभाषणों के द्वारा मुसलमानों को मुकाबले के लिए उभारा और दूसरी ओर युद्ध की परिस्थितियों में काम के लिए विभिन्न आवश्यक आदेश दिए। मुसलमानों को बार-बार संग्रामों और अभियानों में जाना पड़ता था और अधिकतर ऐसे रास्तों से गुज़रना होता था जहां पानी प्राप्त नहीं किया जा सकता था। अनुज्ञा दी गई कि पानी न मिले तो बुजू और नहाने दोनों के बदले ‘तयम्मुम‘ कर लिया जाए। इसके अलावा ऐसी परिस्थितियों में नमाज़ को संक्षिप्त करने की भी अनुमति दे दी गई और जहां ख़तरा सिर पर हो वहां भय की दशा में नमाज़ पढ़ने का तरीका बताया गया। 

अरब के विभिन्न भू भागों में जो मुसलमान काफिर कबीलों के मध्य बिखरे हुए ये उनके विषय में विस्तृत आदेश दिए गए और कड़ी पकड़ की गई और उन्हें स्पष्ट शब्दों में अंतिम चेतावनी दी गई।

कपटाचारियों के विभिन्न गिरोह विभिन्न नीति अपनाए हुए थे। उन सबको अलग-अलग वर्गों में विभक्त करके हर वर्ग के कपटाचारियों के सम्बन्ध में यह बता दिया गया कि उनके साथ वह बर्ताव होना चाहिए।

वचनबद्ध निष्पक्ष कबीलों के साथ जो नीति मुसलमानों की होनी चाहिए उसे भी व्यक्त किया गया- सबसे अधिक महत्वपूर्ण यह बात थी कि मुसलमानों का अपना चरित्र निष्कलंक हो क्योंकि इस संघर्ष में यह मुट्ठी भर जमाअत अगर जीत सकती थी तो अपने उच्च चरित्र के बल पर ही जीत सकती थी। इसलिए मुसलमानों को उच्चतम नैतिकताओं की शिक्षा दी गई और जो कमज़ोरी भी उनकी जमाअत में ज़ाहिर हुई उस पर सख्ती से पकड़ की गई।

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