मुहम्मद (सल्ल0) के पैग़म्बर बनने से पहले की नैतिक विशेषताएं

Moral characteristics of Muhammad (PBUH) before becoming a prophet

मुहम्मद (सल्ल0) के पैगम्बर बनने से पहले की दुनिया की विशषताएँ ये थीं कि अरब कबीले एक दूसरे पर वर्चस्व प्राप्त करने के लिए आपसी द्वेष, लडाईयाँ, तुच्छ मामलों पर रक्तपात, दुराचार, बर्बरता एवं अन्धविश्वास में लिप्त थे ।

मानव जाति के लिए, विशेष रूप से कमजोर वर्ग एवं महिला जाति के लिए कोई आदर भाव न था । महिलाओं को पुरुष के भोग विलास के लिए प्रयुक्त की जाने वाली वस्तु समझा जाता था ।

उस समय पुत्री का जन्म एक लज्जापूर्ण विषय होता था तथा उसे स्वयं उसके पिता द्वारा जीवित दफन कर दिया जाता था। कुरआन में सर्वशक्तिमान अल्लाह फ्रमाता हैः

“और जब उनमे से किसी को पुत्री के जन्म की शुभ सुचना दी जाती थी,

उसका चेहरा काला पड़ जाता और वह दुख में डूब जाता” ।

(कुरआन 16:58)

उस समय के प्राचीन अरब समाज के सामने हत्या और लूट एक बड़ी समस्या थी। उत्पीड़न व हिंसा कोने कोने में फैली हुयी थी । इस तरह, मानवता अन्धकार व अज्ञानता में ग्रस्त थी, पीड़ा से कराह रही थी व उत्पीड़न, अन्याय, वंचना एवं नैतिक क्षय से त्रस्त थी।

कुरआन मजीद उपरोक्त बुराईयों का वर्णन इस प्रकार करता हैः

“थल और जल में बिगाड़ फैल गया लोगों के अपने हाथों की कमाई से; ताकि अल्लाह स्वाद चखाये उनको उनके कुछ कर्मों का, संभवतः वह रुक जायें” ।

(कुरआन 30:41)

कुरआन के अवतरण के प्रारम्भ से पहले और बाद का पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल0) जीवन उपरोक्त विश्लेषण की प्रासंगिकता को चित्रत करता है।

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Muhammad (सल्ल0) पैगम्बरी से पहले भी आपकी नैतिक विशेषताओं को स्वीकार किया जाता था जो था विशेषताओं के लिए एक कानून की पुष्टि करती थी।

खदीजा (Khadija) (रजि0) – इस्लाम कबूल करने वाली पहली शख्स और हज़रत मुहम्मद (सल्ल0) की पहली पत्नी

पैग़म्बर बनने से पहले की कुछ मुख्ये नैतिक विशेषताएं-

पैग़म्बर नैतिक विशेषताएं

मुहम्मद (सल्ल0) एक चरवाहे के रूप में जीवन व्यतीत करने के बाद एक व्यापारी बने और आपने अपनी ईमानदारी और योग्यता में ख्याति अर्जित की, जिन मक्का के सम्पूर्ण क्षेत्र में स्वीकार किया जाता था ।

जब मुहम्मद (सल्ल0) ने प्रौढ़ता की आयु में प्रवेश किया तो अल्लाह ने स्वयं ही अज्ञानताकाल से फैली हुई बुराईयों से आपकी रक्षा की ।

आप (सल्ल0) बहुत सादा जीवन व्यतीत करते थे और गर्व और घमण्ड को पसन्द नहीं करते थे ।

आप निर्धनों, अनाथों और विधवाओं से सहानुभूति रखते थे और उनकी सहायता करके उनके कष्टों में भागीदार बनते थे।

आपकी ख्याति एक सत्यनिष्ठ, सदाचारी, सज्जन प्रकृति एवं कर्त्व्यनिष्ठ व्यक्ति के रूप में थी ।

आप सभी बुराईयों जैसे जुआ, शराब और अश्लीलता से बचते थे।

सदैव झगड़ों से अपने आप को दूर रखते थे और आपने कभी किसी को न तो अपशब्द कहे और न किसी को बुरा-भला कहा । इसीलिए आप “अस्-सादिक” (सच्चे) के नाम से प्रसिद्ध थे ।

व्यापारी कारवाँ के नायक के रूप में मुहम्मद को एक नयी संज्ञा अल-अमीन (अमानतदार – ‘The Trustworthy One‘) मिली । संयोगवश अंग्रेजी शब्द आमीन भी इसी धातु से निकला है जिसे प्रार्थना के अन्त में प्रयोग किया जाता है, जो सहृदये स्वीकृति का प्रदर्शन है ।

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मक्का का प्रत्येक व्यक्ति धनी एवं निर्धन, स्त्री, पुरुप अपनी धनराशि और बहुमूल्य वस्तुएँ हजरत मुहम्मद (सल्ल0) के घर सुरक्षित धरोहर के रूप में रखते थे ।

इस भूमिका में मुहम्मद (सल्ल0) की विश्वसनीयता और सतर्क ईमानदारी ने ही आपकी ख्याति अमानतदार व्यक्तित्व के रूप में कर दी थी ।

आपके ऊपर सदैव दो लड़ने वाले पक्षों के बीच में मध्यस्थ के रूप में विश्वास किया जाता था। अली (रज़ि0) बिन अबू तालिव का कथन है, “वह सभी लोग जो आपके निकट आते आपसे प्यार करते” ।

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