क्या मुसलमान काबा की पूजा करते हैं? मुसलमान काबा की तरफ़ मुहं करके नमाज़ क्यूँ पढ़ते हैं?

दुनिया की केन्द्रीय मस्जिदहरम‘ मक्का में स्थित है। ‘काबा’ जो एक घनाकार सन्दूक जैसा ढाँचा है, इसके बीच में स्थित है।

काबा एक अभयारण्य है जहाँ किसी जीव की हत्या नहीं की जा सकती । यदि कोई वहाँ अपने बाप के हत्यारे को भी देखे तो उससे यह आशा की जाती है कि वह हत्यारे को हानि नहीं पहुंचाएगी ।

गैर मुस्लिम भाईयों की ओर से एक सामान्य प्रश्न यह पूछा जाता है कि मुसलमान क्यों अपनी नमाज़ों में काबा की ओर झुकते हैं और उसकी पूजा करते हैं ।

इसका उत्तर बहुत साधारण है । काबा मक्का शहर में स्थित किबला है, किबले से तात्पर्य वह दिशा है जिसकी ओर अपनी नमाज़ों में मुसलमान अपना चेहरा करते हैं ।

muslim worship mecca

यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि यद्यपि मुसलमान नमाज़ के दौरान अपना चेहरा काबे की ओर रखते हैं परन्तु वह काबा की पूजा नहीं करते ।

मुसलमान अल्लाह के अतिरिक्त न तो किसी की इबादत करते हैं और न किसी के समक्ष झुकते हैं । इस्लाम लोगों को एकता के बंधन में बांधने में विश्वास करता है।

कुरान में यह कहा गया है किः

“हम आकाश में तुम्हारे मुँह की गर्दिश देख रहे हैं, तो हम अवश्य ही तुम्हें उसी किबले का अधिकारी बना देंगे जिसे तुम पसंद करते हो । अतः मस्जिदे हराम (काबा) की ओर अपना रुख़ करो ।”

(कुरान , 2:144)

इस्लाम एकता के बंधन में विश्वास रखता है

यदि मुसलमानों को काबा की ओर मुँह करने का निर्देश न दिया गया होता तो मुसलमान सभी दिशाओं में चेहरा रखकर नमाज़ पढ़ा करते ।

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मुसलमानों के बीच अपनी नमाजों के द्वारा एकता की भावना विकसित करने के लिए मुसलमान जहाँ कहीं भी हों उनको एक दिशा की ओर अपना चेहरा रखने का निर्देश दिया गया है और यह दिशा काबा की ओर है।

यदि कुछ मुसलमान काबा से पश्चिम दिशा की ओर रहते हैं तो नमाज में वह अपना चेहरा पूर्व की ओर रखते हैं । इसी प्रकार यदि वे काबा के पूर्व में रहते हैं तो वह अपना चेहरा पश्चिम की ओर करते हैं ।

यदि कोई व्यक्ति उन्हें अंतरिक्ष से नमाज़ पढ़ते हुए देखेगा तो वह पाएगा कि सभी मुसलमान एक ही केंद्र वाले वृत्तों में नमाज पढ़ रहे होंगे। जिन वृत्तों का केन्द्र काबा होगा ।

  • काबा की परिक्रमा एक अल्लाह की ओर संकेत के लिए है

जब मुसलमान मक्का में मस्जिद-ए हराम जाते हैं तो वह काबा की परिक्रमा करते हैं। यह कर्म एक अल्लाह की उपासना और एक अल्लाह में विश्वास की ओर संकेत है जिस प्रकार प्रत्येक वृत्त का एक केंद्र है उसी प्रकार केवल एक ही उपास्य उपासना का अधिकारी है।

  • लोगों ने काबा की छत पर खड़े होकर अजान दी

पैगम्बर के युग में लोग काबा की छत पर खड़े होकर अज़ान दिया करते थे । इस रीति से प्रदर्शित होता है कि पैगम्बर ने काबा की उपासना नहीं की है बल्कि काबा की ओर मुँह करके नमाज़ पढ़ी है।

गैर मुस्लिमों को मक्का में जाने की अनुमति क्यों नहीं है

कुछ गैर मुस्लिम यह भी प्रश्न करते हैं कि दूसरे धर्मों के लोगों को इस्लामी तीर्थ-स्थलों मक्का और मदीना में जाने की अनुमति क्यों नहीं दी जाती ?

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यह सही है कि गैर-मुस्लिमों को मक्का और मदीना के पवित्र शहरों में जाने की कानूनी अनुमति नहीं है इस प्रतिबंध के संभावित कारणों को स्पष्ट करने में निम्नलिखित बिन्दु सहायक हो सकते हैं।

मक्का और मदीना इस्लाम के पवित्र शहर हैं । मुसलमान वहाँ हज करने के लिए जाते हैं। कोई भी व्यक्ति वहाँ मात्र भ्रमण या मनोरंजन के लिए नहीं जाता ।

अतः केवल इस्लामी सिद्धांत ों में आस्था रखने वाले लोगों को ही वहाँ जाने और प्रतिनिधित्व करने की अनुमति दी जाती है।

अन्य धर्मों के केन्द्र भी ऐसे नियम लागू करते हैं । यदि कोई तिरुपति तिरुमाला देवस्थानम्‌ के पवित्र क्षेत्र का भ्रमण करना चाहे तो उसे हिन्दू धर्म में अपना विश्वास घोषित करना होगा ।

गैर हिन्दुओं को यहाँ भ्रमण करने से रोका गया है क्योंकि यह मंदिर कोई भ्रमण या मनोरंजन स्थल नहीं है। बहुत से ऐसे धर्म-स्थल हैं जहाँ दलितों को जाने की अनुमति नहीं है और वहाँ महिलाओं का जाना भी प्रतिबंधित है और मांसाहारी व्यक्तियों पर कुछ पाबन्दियाँ हैं।

अपने ही देश में ऐसे क्षेत्र होते हैं जहाँ सामान्य नागरिकों का प्रवेश वर्जित होता है। जो व्यक्ति रक्षा विभाग से सम्बन्ध नहीं रखता वह छावनी क्षेत्र में नहीं जा सकता ।

नाभिकीय रिएक्टर, जो प्रयोगशालाएं संवेदनशील क्षेत्रों में शोध कार्य में लगी हुई हैं और अभिसूचना के मुख्यालयों में सामान्य व्यक्तियों का प्रवेश वर्जित होता है।

जिन व्यक्तियों को वहां जाने की अनिवार्य आवश्यकता होती है वह उपयुक्त अधिकारियों से पूर्व अनुमति लेकर ही जा सकते हैं।

किसी छावनी क्षेत्र में प्रवेश पर प्रतिबंध के संबंध में सामान्य नागरिकों का आपत्ति करना तर्क विरोधी होगा । इसी तरह गैर मुस्लिमों के लिए यह उपयुक्त नहीं है कि मक्का और मदीना में प्रवेश पर जो प्रतिबंध है उस पर आपत्ति उठाएं।

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सभी देश विदेशी नागरिकों को अपने देश में प्रवेश की अनुमति देने पर कुछ नियम और सिद्धांत लागू करते हैं । वीज़ा उसी समय जारी किया जाता है जब वह उन नियमों का पालन करने के अनुबंध पर हस्ताक्षर कर दें ।

इसी तरह सऊदी अरब लोगों को हज के इन केंद्रों की यात्रा करने की अनुमति उनके धर्म की पुष्टि करने के बाद ही देता है।

जो लोग इस्लाम धर्म में विश्वास नहीं रखते, उन्हें पवित्र क्षेत्र से दूर रखा जाता है परन्तु वह अन्य शहरों में व्यापार, रोजगार और पर्यटन के लिए जा सकते हैं ।

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