खदीजा (Khadija) (रजि0) – इस्लाम कबूल करने वाली पहली शख्स और हज़रत मुहम्मद (सल्ल0) की पहली पत्नी

Khadija (RA) – The First person to accept Islam and the First wife of Prophet Muhammad (SAW)

मक्का के सर्वाधिक धनवान व्यापारियों में से एक महिला खदीजा (Khadija) (रजि0) थीं जो विधवा थीं । वह एक ईसाई भिक्षु वरका (Waraqah) की रिश्ते की बहन थीं ।

वह एक युवक मुहम्मद (सल्ल0) के सम्बन्ध में सुना करती थीं, जो एक “ईमानदार, पारदर्शी एवं योग्य” व्यक्ति थे । अतः उन्होंने निर्णय लिया कि उनकी परीक्षा ली जाये।

खदीजा (रज़ि0) ने अपने प्रतिनिधि के माध्यम से मुहम्मद (सल्ल0) को कुछ सामान ले जाकर सीरिया (Syria) में बेचने को कहा । हज़रत खदीजा ने इस व्यापार में सफल होने पर दोगुना कमीशन का वचन भी दिया ।

मुहम्मद (सल्ल0) ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और हज़रत ख़दीजा (रज़ि0) के एक दास मैसरः (Maysarah) के साथ व्यापारिक यात्रा पर निकले।

सीरिया में मुहम्मद (सल्ल0) ने इस प्रकार वाणिज्य व्यापार की व्यवस्था की जिसके कारण खदीजा (रज़ि0) को दुने से अधिक लाभ हुआ।

कारवाँ के लौटने के पश्चात खदीजा (रज़ि0) ने धैर्यपूर्वक मैसर: के माध्यम से यात्रा का विवरण सुना, जिसने उस युवक के व्यक्तित्व और व्यवहार का सावधानीपूर्वक निरीक्षण किया था जिसकी आयु लगभग 25 वर्ष थी ।

हज़रत ज़ैद इब्न हारीसा (रज़ि0) – हज़रत मुहम्मद (सल्ल0) के दत्तक पुत्र (Adopted Son)

मैसर: ने उन्हें बताया कि यात्रा के दौरान मुहम्मद (सल्ल0) की प्रकृति और व्यवहार में उसने अनेक निशानियों का अवलोकन किया है जिससे प्रमाणित होता है कि वह अन्य व्यक्तियों जैसे नहीं हैं।

इसके बाद हज़रत खदीजा (रज़ि0) ने अपनी एक सहेली नफ़ीसा से कि वह मुहम्मद (सल्ल0) से सम्पर्क करके मालूम करें कि क्या वह विवाह में रुचि रखे हैं।

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मुहम्मद (सल्ल0) ने नफ़ीसा को उत्तर दिया कि विवाह उनके आर्थिक सामर्थ्व से बाहर है। नफ़ीसा ने हज़रत खदीजा के नाम का उल्लेख किया और बताया कि उनके साथ वह “प्रतिष्ठा, वंशानुक्रम, सौन्दर्य एवं सम्पत्ति” प्राप्त कर सकते हैं और उसने खदीजा (रज़ि0) से विवाह का औपचारिक प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया ।

उनके शब्द इस प्रकार थे: उन्होंने अपने पत्र में लिखा, “ऐ मेरे चाचा के बेटे” “मैं आपको हमारे सम्बन्धों के कारण पसन्द करती हूँ और आपके लोगों में आपकी प्रतिष्ठा, आपकी विश्वसनीयता, सद्चरित्र एवं सच्चाई के कारण भी” ।

मुहम्मद (सल्ल0) ने उत्तर दिया कि उन्हें यह प्रस्ताव पसन्द है परन्तु अपनी आर्थिक दशा के कारण वह ऐसे विवाह बन्घन पर विचार नहीं कर सकते । नफ़ीसा ने परामर्श दिया कि मामलात आप उसके ऊपर छोड़ दें, वह सामंजस्य स्थापित कर देंगी।

तब नफ़ीसा ने मुहम्मद (सल्ल0) का विचार विवाह के पक्ष में होने की सूचना खदीजा (रज़ि0) को दी । हज़रत खदीजा (रजि0) ने मुहम्मद (सल्ल0) को अपने घर आमन्त्रित किया और विवाह का प्रस्ताव किया, जिसे आपने स्वीकार कर लिया ।

आपके सगे-सम्बन्धियों और परिवार के लोगों ने प्रस्तावित विवाह पर सहमति व्यक्त की । हदीसों से ज्ञात होता है कि विवाह के समय हज़रत खदीजा (रजि0) की आयु 40 वर्ष थी ।

Khadija (RA) इस्लाम कबूल करने वाली पहली शख्स बानी। जब मुहम्मद सल्ल0 ने जिब्रिल (अलै0) से अपना पहला इलहाम किया, उन्होंने इस्लाम स्वीकार कर लिया।

आप (सल्ल0) ने खदीजा (रजि0) के जीते जी कभी दूसरी शादी नहीं की।

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