इस्लाम और नस्लवाद – गोरे काले से श्रेष्ठ नहीं

पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल0) ने यह भी घोषणा की “यदि किसी हब्शी काले को भी मुसलमानों पर शासक बना दिया जाए तो उसका आज्ञा पालन किया जाना चाहिए” । पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल0) ने नस्लवाद अथवा रंगभेद की समस्या का उन्मूलन इतनी ही सफलतापूर्वक किया, उदाहरण के लिए –

1.  इस्लामी राज्य के दूसरे खलीफा हज़रत उमर (रज़ि0) जो इतिहास में प्रसिद्ध हैं, जब भी वह हज़रत बिलाल (रजि0) को देखते जो हब्शी दास थे तो वह उनके सम्मान में खड़े हो जाते और यह कहते हुए उनका स्वागत करते, “हमारे स्वामी आ गये, हमारे स्वामी आ गये” । कुरआन और पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल0) ने अरबों के अंदर किस सीमा तक आमूल परिवर्तन किया ।

2. जैद् बिन हारिस एक काले दास थे । पैगम्बर सल्ल0) ने जब रोमन साम्राज्य के विरुद्ध मुस्लिम सेना को भेजा तो आपने उन्हें उसका सेनापति नियुक्त किया।

3. ओसामा एक काले दास थे, पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल0) ने उनको मुस्लिम सेना का सेनापति नियुक्त किया ।

4. एक दिन अबू ज़र अल-गिफारी (रजि0) एक मुसलमान के पास बैठे हुए थे जो काले थे। अबू जर (रजि0) ने उन्हें “काला” कहकर सम्बोधित किया । यह सुनकर पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल0) अत्यंत अप्रसनन हुए और अबू ज़र (रजि0) से सुधार लाने के लिए कहा और आपने कहा, “गोरे लोग कालों की तुलना में श्रेष्ठ नहीं हैं” ।

ज्यों ही पैगम्बर (सल्ल0) ने उनको डाँटा, अबू ज़र अपनी गलती पर सचेत हो गये। और वह लज्जा से जमीन पर लेट गये और जिस व्यक्ति को उन्होंने कष्ट पहुँचाया था उससे कहा, “खड़े हो जाइये और अपना पैर मेरे चेहरे पर रगड़ दीजिए” . 

Islam and racism

5. आज भी हम सभी जानते हैं कि काले हब्शियो और पिछड़े वर्गों के साथ गोरी नेस्ल और उच्च जाति के लोग कैसा व्यवहार करते हैं। लगभग 14 सदी पहले इस्लाम के पैगम्बर (सल्ल0) के जमाने में हजरत बिलाल (रजि0), जो काले दास थे, की दशा पर विचार कीजिए ।

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इस्लाम के प्रारम्भिक दिनों में नमाज़ के लिए अज़ान देने की भूमिका को एक सम्मान समझा जाता था और यह भूमिका इन्हीं काले दास को प्रदान की गयी थी ।

मक्का विजय के बाद पैगम्बर (सल्ल0) ने उन्हें अजान देने का आदेश दिया। और यह काले दास काबा की छत पर चढ़ गये जो कि सर्वाधिक ऐतिहासिक और मुस्लिम संसार का सर्वाधिक पवित्र स्थान है।

पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल0) ने एक बार देखा कि एक धनवान मुसलमान साथी अपने पास में बैठे एक निर्धन मुसलमान से दूरी बनाए रखने के लिए अपने ढीले कपड़े समेट रहा है । पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल0) ने इस पर कहा, “क्या तुम्हें डर है कि उसकी निर्धनता तुमसे चिपक जायेगी” ।

इस प्रकार पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल0) ने ऐसा प्रबल परिवर्तन किया कि अरबों में से जन्म के आधार पर सबसे सज्जन और शुद्ध लोगों ने अपनी बेटियों की शादी हब्शी दासों के की।

यही कारण है कि जर्मन कवियों में से सबसे बड़े कवि गोएथ (Johann Wolfgang von Goethe) ने कुरान के सम्बन्ध में बोलते हुए कहा, “यह पुस्तक समस्त युगों में सर्वाधिक प्रबल प्रभाव डालती रहेगी” ।

और यही कारण है कि जॉर्ज बर्नार्ड शॉ (George Bernard Shaw) कहते हैं, “यदि इंग्लैंड ही नहीं; कि यूरोप पर राज करने का अवसर किसी धर्म को मिलना है तो अगले सौ वर्षों में यह धर्म इस्लाम होगा”।

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