रसूल

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 पैग़म्बर, दूत, वह व्यक्ति जो रिसालत के पद पर नियुक्त हो । ऐसा व्यक्ति जिसके द्वारा अल्लाह लोगों को अपना मार्ग दिखाता और उन तक अपना संदेश पहुंचाता है। उसे रसूल या नबी कहते हैं।

रसूल और नबी में थोड़ा अंतर पाया जाता है। रसूल वह पैग़म्बर होता है जिसे अल्लाह की ओर से नई शरीअत (धर्म-विधान) और किताब प्रदान हुई हो। नबी हरेक पैग़म्बर को कहते हैं, चाहे उसे नई शरीअत और किताब मिली हो या उसे केवल पूर्व-कालिक किताब और शरीअत पर लोगों को चलाने का कार्यभार सौंपा गया हो।

ख़ुदा के पैग़म्बर या नबी संसार के विभिन्न भागों में आए हैं, उनकी एक बड़ी संख्या है, जिनमें से हम कुछ ही नबियों के नाम से परिचित हैं। नबियों की मौलिक शिक्षाएँ एक रहीं हैं।

मुस्लिम के लिए अनिवार्य किया गया है कि वह सभी नबियों पर ईमान लाए और उनके प्रति अपने हृदय में श्रद्धा और प्रेम बनाए रखे। भले ही उन नबियों में से किसी या किन्हीं के समुदाय के लोग उसके शत्रु ही क्यों न हों, और शत्रुता में वे कितने ही आगे क्यों न बढ़े हुए हों।

जैसे मुसलमान के लिए अनिवार्य है कि वह हज़रत मूसा (अलै0) को पैग़म्बर स्वीकार करे और उनके प्रति आदर भाव रखे, हालाँकि हज़रत मूसा (अलै0) को मानने वाले यहूदियों की इस्लाम और मुसलमानों से शत्रुता कोई छिपी हुई चीज़ नहीं है।