मुशरिक

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अनेकेश्वरवादी, बहुदेववादी, शिर्क करने वाला, किसी अन्य को अल्लाह के समकक्ष घोषित करने वाला। मुशरिक वह व्यक्ति है जो अल्लाह के अस्तित्व या उसके गुणों या उसके हक़ में दूसरों को साझीदार बनाए। अस्तित्व में साझीदार ठहराने का यह अर्थ है कि ‘किसी से उसको या उससे किसी को उत्पन्न होने की धारणा रखी जाए। जैसे किसी को उसका बाप या उसकी संतान समझी जाए। गुणों में दूसरों को अल्लाह का साझीदार ठहराने का अर्थ यह होता है खुदा के विशेष गुणों का सम्बन्ध दूसरों से भी जोड़ा जाए। उदाहरणार्थ कोई यह समझने लगे कि जगत की रचना में किसी अन्य देवी-देवता का भी हाथ है या कोई यह मानने लगे कि कुछ और हस्तियाँ भी हैं जो स्वतंत्र अधिकार रखती हैं कि जो चाहें करें, जिसका चाहें काम बना दें और जिसका चाहें बिगाड़ दें।

हक़ और अधिकार में अल्लाह का शरीक ठहराने का अर्थ यह है कि जो हक और अधिकार अल्लाह का होता है उसमें वह दूसरों को भी साझीदार समझने लगे। जैसे- जगत का स्वामी और भ्रष्टा अल्लाह है तो उपासना भी उसी की होनी चाहिए। अब यदि कोई अल्लाह से हट कर किसी दूसरे की बन्दगी और पूजा करता है तो यह अल्लाह के हक़ में दूसरे को शरीक ठहराना होगा। और ऐसा करने वाले को मुशरिक कहा जाएगा।