महर

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वह रकम या माल जो विवाह के नाते से पति अपनी पत्नी को देता है। कुरआन में इसके लिए ‘सदकात’ शब्द प्रयुक्त हुआ है जो ‘सदका’ का बहुवचन है। सदका की व्युत्पत्ति ‘सिदक़’ से हुई है, सच्चाई, मित्रता दुरुस्ती आदि इसके कई अर्थ होते हैं। महूर वास्तव में स्त्री-पुरुष के सम्बन्धों और उनके प्रेम-भाव के बने रहने का एक प्रतीक या चिन्ह है।