इहराम

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हज करने वाले मक्का नगर पहुंचने से पहले एक निश्चित स्थान पर स्नान कर के एक विशेष प्रकार का फकीराना वस्त्र धारण कर लेते हैं, यही इहराम है। इस वस्त्र में केवल एक तहमद (बिना सिली हुई लुंगी) और एक चादर होती है जिसको ऊपर से ओढ़ लेते हैं। औरतों के लिए इहराम सिले हुए वस्त्र ही हैं।

इस वस्त्र धारण करने के पश्चात बहुत सी चीजें आदमी पर हराम हो जाती हैं जो सामान्य अवस्था में हराम नहीं होतीं। जैसे सुगंध का प्रयोग, बाल कटवाना, साज-सज्जा और पति-पत्नी प्रसंग आदि। इन चीज़ों के हराम होने ही के कारण इस वस्त्र को इहराम कहा जाता है। इहराम की हालत में यह पाबंदी भी है कि किसी जीव का वध न किया जाए और न किसी जानवर का शिकार किया जाए और न ही किसी शिकारी को शिकार का पता बताया जाए।