अल्लाह

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ईश्वर, खुदा। अल्लाह शब्द वास्तव में ‘अल-इलाह’ था जो परिवर्तित हो कर अल्लाह हो गया। ‘अल’ अरबी भाषा में उसी प्रकार प्रयुक्त होता है। जैसे अंग्रेज़ी में किसी शब्द से पहले (द-The) शब्द लगा कर उसे विशिष्टता प्रदान कर देते हैं।

इस प्रकार अल्लाह से अभिप्राय एक प्रमुख और विशिष्ट इलाह (पूज्य) हुआ। अल्लाह आरंभ से ही उसी सत्ता का नाम रहा है जो सम्पूर्ण सद्गुणों से युक्त, विश्व का रचयिता और सबका स्वामी और पालन कर्ता है।

धात्वर्थ की दृष्टि से ‘इलाह’ उसे कहा जाएगा जो सर्वोच्च और रहस्यमय हो, हमारी आँखें जिसे पाने में असफल रहें, जिसकी पूर्णरूप से कल्पना भी न कर सकें, जो मनुष्य का शरणदाता हो, जिसकी ओर वह पूर्ण अभिलाषा से लपक सके, जिसे वह संकटों में पुकार सके, जो शांति प्रदान कर सकता हो, जो अपने बन्दों की ओर प्रेम पूर्वक बढ़ता हो और जिसकी ओर बन्दे भी प्रेम से बढ़ सकें, जो मनुष्य का प्रिय और अभीष्ट हो, जिसे वह अपना आराध्य और पूज्य बना सके। ये समस्त विशेषताएँ केवल ‘अल्लाह’ ही में पाई जाती हैं। इसलिए वास्तव में वही अकेला ‘इलाह’ और पूज्य है।