इस्लाम की शिक्षाओं और मुसलमानों के अपने अमल के बीच अंतर

अगर इस्लाम दुनिया का सबसे अच्छा धर्म है तो आख़िर बहुत से मुसलमान बेईमान क्यों हैं और धोखाधड़ी और रिश्वत और घूसखोरी में क्यों लिप्त हैं?

अच्छा धर्म है तो फिर मुसलमान बेईमान क्यों हैं

गलत लोग हर समुदाय में मौजूद हैं

हम जानते हैं कि कुछ मुसलमान बेईमान और भरोसे के लायक नहीं हैं। वे धोखाधड़ी आदि कर लेते हैं। लेकिन असल बात यह है कि मीडिया इस बात को इस तरह पेश करता है जैसे ये सिर्फ़ मुसलमान ही हैं जो इस प्रकार की गतिविधियों में लिप्त हैं।

हर समुदाय के अन्दर कुछ बुरे लोग होते हैं और हो सकते हैं। इन कुछ लोगों की वजह से उस धर्म को दोषी नहीं ठहराया जा सकता जिसके वे नाम मात्र अनुयायी हैं।

कुल मिलाकर मुसलमान सबसे अच्छे हैं

मुसलमानों में बुरे लोगों की मौजूदगी के बावजूद मुसलमान कुल मिलाकर दुनिया के सबसे अच्छे लोग हैं। मुसलमान ही वह समुदाय है जिसमें शराब पीने वालों की संख्या सबसे कम है और शराब न पीने वालों की संख्या सबसे ज्यादा।

मुसलमान कुल मिलाकर दुनिया में सबसे ज्यादा धन-दौलत गरीबों और भलाई के कामों में खर्च करते हैं। सुशीलता, शर्म व हया, सादगी और शिष्टाचार, मानवीय मूल्यों और नैतिकता के मामले में मुसलमान दूसरों के मुकाबले में बहुत बढ़कर हैं।

मीडिया इस्लाम की गलत तस्वीर पेश करता है

(क) इस्लाम बेशक सबसे अच्छा धर्म है लेकिन असल बात यह है कि आज मीडिया की नकेल पश्चिम वालों के हाथों में है, जो इस्लाम से भयभीत हैं। मीडिया बराबर इस्लाम के विरुद्ध बातें प्रकाशित और प्रसारित करता है।

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वह या तो इस्लाम के विरुद्ध ग़लत सूचनाएँ उपलब्ध कराता है और इस्लाम से संबंधित ग़लत-सलत उद्धरण देता है या फिर किसी बात को जो मौजूद हो ग़लत दिशा देता और उछालता है।

(ख) अगर कहीं बम फटने की कोई घटना होती है तो बगैर किसी प्रमाण के सबसे पहले किसी मुसलमान को दोषी ठहरा दिया जाता है। समाचार पत्रों में बड़ी-बड़ी सुर्खियों में उसे प्रकाशित किया जाता है।

फिर जब आगे चलकर यह पता चलता है कि इस घटना के पीछे किसी मुसलमान के बजाए किसी गैर-मुस्लिम का हाथ था तो इस ख़बर को पहले वाला महत्व नहीं दिया जाता और छोटी-सी खबर दे दी जाती है।

(ग) अगर कोई 50 साल का मुसलमान व्यक्ति 15 साल की मुसलमान लड़की से उसकी इजाज़त और मर्ज़ी से शादी करता है तो यह खबर अखबार के पहले पन्ने पर प्रकाशित की जाती है।

लेकिन अगर कोई 50 साल का गैर-मुस्लिम व्यक्ति 15 साल की लड़की के साथ बलात्कार करता है तो इसकी  ख़बर को अख़बार के अन्दर के पन्ने में संक्षिप्त समाचार के कॉलम में जगह मिलती है।

कार को ड्राइवर से मत तौलिए

अगर आपको किसी नवीनतम मॉडल की कार के बारे में यह अंदाजा लगाना हो कि वह कितनी अच्छी है और फिर एक ऐसा शख्स जो कार चलाने की विधि से परिचित न हो लेकिन वह कार चलाना चाहे तो आप किसको दोष देंगे? कार को या ड्राइवर को?

स्पष्ट है कि इसके लिए ड्राइवर को ही दोषी ठहराया जाएगा। इस बात का पता लगाने के लिए की कार कितनी अच्छी है, कोई भी बुद्धिमान व्यक्ति उसके ड्राइवर को नहीं देखता बल्कि उस कार की खूबियों को देखता है। उसकी रफ़्तार क्या है? ईंधन की खपत कैसी है? सुरक्षात्मक उपायों से संबंधित क्या कुछ मौजूद है? इत्यादि।

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अगर हम इस बात को स्वीकार भी कर लें कि मुसलमान बुरे होते हैं, तब भी हमें इस्लाम को उसके मानने वालों के आधार पर नहीं तौलना और परखना चाहिए।

अगर आप सही मानों में इस्लाम की क्षमता को जानने और परखने की ख़ूबी रखते . हैं तो आपको उसके उचित और प्रमाणित स्रोतों (कुरान और सुन्नत) को सामने रखना चाहिए।

इस्लाम को उसके सही अनुयायी पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) के द्वारा जाँचिए और परखिए

अगर आप व्यावहारिक रूप से जानना चाहते हैं कि कार कितनी अच्छी है तो उसको चलाने पर एक माहिर कार ड्राइवर को नियुक्त कीजिए। इसी तरह सबसे बेहतर और इस्लाम पर अमल करने के लिहाज़ से सबसे अच्छा नमूना जिसके द्वारा आप इस्लाम की असल ख़ूबी को महसूस कर सकते हैं पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) हैं।

बहुत से ईमानदार और निष्पक्ष ग़ैर-मुस्लिम इतिहासकारों ने भी इस बात का साफ़-साफ़ उल्लेख किया है कि पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल.) सबसे अच्छे इंसान थे।

Michael H. Hart जिसने “इतिहास के सौ महत्वपूर्ण प्रभावशाली लोग (The 100 :A Ranking of the Most Influential Persons in History)” पुस्तक लिखी है उसने इन महान व्यक्तियों में सबसे पहला स्थान पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) को दिया है। ग़ैर-मुस्लिमों द्वारा पैगम्बर हज़रत मुहम्मद (सल्ल-) को श्रद्धांजलि प्रस्तुत करने के इस प्रकार के अनेक नमूने हैं।

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