सूरह नूर (24)

सूरह नूर
“An-Nur”

कहाँ नाज़िल हुई: मदीना
आयतें:64 verses
पारा:18

नाम रखने का कारण

आयत 34 “अल्लाह आकाशों और धरती का प्रकाश (नूर) है” से उद्धृत है।

आवतरणकाल

इसपर सब सहमत हैं कि यह सूरह बनी मुस्तलिक के अभियान के पश्चात् अवतरित हुई है। किन्तु इसमें मतभेद हैं कि यह अभियान सन् 05 हिजरी में अहज़ाब के अभियान से पहले घटित हुआ था या सन् 06 हिजरी में अहज़ाब के अभियान के पश्चात् ।

वास्तविक घटना क्या है, इसकी जाँच-पड़ताल शरीअत के निहित हित (को समझने के लिए भी आवश्यक है, जो परदे के आदेशों में पाई जाती है, क्योंकि यह) आदेश कुरआन मजीद की दो ही सूरतों में आए हैं, एक यह सूरह और दूसरी सूरह 33 (अहज़ाब) जिसका अवतरण सभी के मतानुसार अहज़ाब के अभियान के अवसर पर हुआ है।

इस उद्देश्य से जब हम सम्बद्ध उल्लेखों की छानबीन करते हैं, तो सही बात यही मालूम होती है कि यह सूरह) सन् 06 हिजरी के उत्तरार्द्ध में सूरह 33 (अहज़ाब) के कई महीने बाद अवतरित हुई है।

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