सूरह क़मर (54)

सूरह क़मर
“Al-Qamar”

कहाँ नाज़िल हुई:मक्का
आयतें:55 verses
पारा:27

नाम रखने का कारण

पहली ही आयत के वाक्य “और चाँद (कमर) फट गया” से उद्धृत है। मतलब यह है कि वह सूरह जिसमें अल-कमर आया है।

अवतरणकाल

इसमें चाँद के फटने की घटना का उल्लेख हुआ है, जिससे इसका अवतरणकाल निश्चित हो जाता है। हदीस के ज्ञाता और कुरआन के टीकाकार इस पर सहमत हैं कि यह घटना हिजरत के लगभग पाँच वर्ष पूर्व मक्का मुअज्ज़मा में मिना के स्थान पर घटित हुई थी।

विषय और वार्ता

इसमें मक्का के काफ़िरों को उस हठधर्मी पर चेतावनी दी गई है जो उन्होंने अल्लाह के रसूल (सल्ल.) के आह्वान के मुकाबले में अपना रखी थी।

चाँद के फटने की आश्चर्यजनक घटना इस बात का स्पष्ट प्रमाण थी कि जगत् की व्यवस्था अनादिकालिक और शाश्वत और अनश्वर नहीं है। वह छिन्न-भिन्न हो सकती है।

बड़े-बड़े नक्षत्र और तारे फट सकते हैं और वह सब कुछ हो सकता है जिसका चित्रण कयामत के विस्तृत वर्णन में कुरआन ने किया है। यही नहीं, बल्कि यह इस बात का भी पता दे रहा था कि जगत्-व्यवस्था के टूट-फूट का आरम्भ हो गया है और वह समय निकट है जब कयामत घटित होगी।

मगर काफ़िरों ने इसे जादू का चमत्कार घोषित किया और अपने इनकार पर दृढ़ रहे। इसी हठधर्मी पर इस सूरह में उनकी निन्दा की गई है।

वार्ता का आरम्भ करते हुए कहा गया है कि ये लोग न समझाने से मानते हैं, न इतिहास से शिक्षा ग्रहण करते हैं और न आँखो से खुली निशानियाँ देखकर ईमान लाते हैं।

ये भी पढ़े -   सूरह अबासा (80)

अब ये नूह (अलै.) की जाति, आद, समूद, लूत (अलै.) की क़ौम और फिरऔनियों का वृत्तान्त संक्षिप्त शब्दों में वर्णित करके बताया गया है कि ईश्वर के भेजे हुए पैग़म्बरों की चेतावनियों को झुठलाकर इन जातियों को किस पीड़ाजनक यातना का सामना करना पड़ा और एक-एक जाति का वृत्तान्त प्रस्तुत करने के बाद बार-बार यह बात दोहराई गई है कि यह कुरआन शिक्षा का सहज आधार है जिससे यदि कोई जाति शिक्षा ग्रहण करके सीधे मार्ग पर आ जाए तो उन यातनाओं की नौबत नहीं आ सकती जिनमें वे जातियाँ ग्रस्त हुई इसके बाद मक्का के काफिरों को सम्बोधित करके कहा गया है कि जिस नीति पर दूसरी जातियाँ दण्डित हो चुकी हैं, वही नीति यदि तुम अपनाओगे तो आखिर तुम दण्ड क्यों नहीं पाओगे?

और यदि तुम अपने जत्थे पर फूले हुए हो तो शीघ्र ही तुम्हारा यह जत्था पराजित होकर भागता दिखाई देगा और इससे अधिक कठोर मामला तुम्हारे साथ कयामत के दिन होगा।

अंत में काफिरों को यह बताया गया है कि सर्वोच्च अल्लाह को कयामत लाने के लिए किसी बड़ी तैयारी की आवश्यकता नहीं है। उसका बस एक हुक्म होते ही पलक झपकाते ही वह घटित हो जाएगी।

किन्तु हर चीज़ की तरह जगत्-व्यवस्था और मानव जाति की भी एक नियति है। इस नियति के अनुसार जो समय इस काम के लिए निश्चित है, उसी समय पर यह होगा। यह नहीं हो सकता कि जब कोई चुनौती दे तो उसको काइल करने के लिए कयामत ला खड़ी की जाए।

Leave a Reply