सूरह अलक (96)

सूरह अलक
“Al-Alaq”

कहाँ नाज़िल हुई:मक्का
आयतें:19 verses
पारा:30

नाम रखने का कारण

दूसरी आयत के “अलक़” (खून का लोथड़ा) शब्द को इस सूरह का नाम दिया गया है।

अवतरणकाल

इस सूरह के दो भाग हैं। पहला आरम्भ से लेकर पाँचवीं आयत के वाक्यांश “जिसे वह न जानता था” पर समाप्त होता है और दूसरा भाग आयत 6 से शुरू हो कर सूरह के अन्त तक चलता है।

पहले भाग के सम्बन्ध में मुस्लिम समुदाय के विद्वानों की बड़ी संख्या इस बात पर सहमत है कि यह सबसे पहली प्रकाशना है जो अल्लाह के रसूल (सल्ल0) पर अवतरित हुई।

दूसरा भाग बाद में उस समय अवतरित हुआ जब अल्लाह के रसूल (सल्ल0) ने हरम (काबा की मस्जिद में नमाज़ पढ़नी शुरू की और अबू जहल ने आप को धमकियाँ देकर इससे रोकने की कोशिश की।

ये भी पढ़े -   सूरह इंशिकाक (84)

Leave a Reply