रोज़े की हालत में पानी से कुल्ली या नहाना जायज़ है?

रोज़े की हालत में पानी से कुल्ली या नहाना जायज़ है

इस्लाम में रोज़ा एक महत्वपूर्ण इबादत है, जिसमें इंसान पूरे दिन अल्लाह की बंदगी के लिए खाने-पीने और दूसरी चीज़ों से परहेज़ करता है। रोज़े के दौरान कई लोग यह सवाल करते हैं कि क्या पानी से कुल्ली करना या नहाना रोज़े में जायज़ है? कहीं इससे रोज़ा टूट तो नहीं जाएगा? इस लेख में हम कुरआन और हदीस की रोशनी में इस विषय को विस्तार से समझेंगे।

रोज़े के दौरान किन चीज़ों से बचना जरूरी है?

रोज़े के दौरान मुख्य रूप से तीन चीज़ों से परहेज़ करना जरूरी है:

1. जानबूझकर खाना-पीना – अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर कुछ खा या पी ले, तो उसका रोज़ा टूट जाता है।

2. शारीरिक संबंध – पति-पत्नी का आपसी संबंध भी रोज़ा तोड़ देता है।

3. कोई भी ऐसा काम जो रोज़े की मूल भावना के खिलाफ हो – जैसे झूठ बोलना, ग़ीबत करना (चुगली करना) आदि।

अब सवाल उठता है कि क्या रोज़े की हालत में कुल्ली करना या नहाना इन नियमों का उल्लंघन करता है?

रोज़े की हालत में कुल्ली करने का हुक्म

इस्लाम में वुज़ू करना और साफ-सफाई रखना बहुत अहमियत रखता है। वुज़ू में कुल्ली करना भी शामिल है। लेकिन रोज़े की हालत में कुल्ली करते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

1. वुज़ू में कुल्ली करना

रोज़े की हालत में वुज़ू करते वक्त कुल्ली करना जायज़ है और इससे रोज़ा नहीं टूटता।

लेकिन हदीस में आता है कि नबी ﷺ ने रोज़े के दौरान कुल्ली और नाक में पानी डालते वक्त यह हिदायत दी कि इसे हल्के तौर पर करें और अतिश्योक्ति न करें।

अबू दाऊद की हदीस है:

"रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया: वुज़ू करते समय नाक में अच्छी तरह पानी डालो, सिवाय जब तुम रोज़े की हालत में हो।" (अबू दाऊद: 142)

2. गलती से पानी हलक में चला जाए तो?

अगर कोई रोज़े की हालत में कुल्ली कर रहा हो और गलती से पानी हलक में चला जाए, तो रोज़ा टूट जाएगा और उसकी क़ज़ा (बाद में उस रोज़े को पूरा करना) करना होगी।

लेकिन अगर बिल्कुल अनजाने में या भूले से ऐसा हुआ तो रोज़ा टूटा नहीं माना जाएगा।

रोज़े की हालत में नहाने का हुक्म

गर्मी के मौसम में कई बार इंसान को नहाने की जरूरत महसूस होती है। इसके अलावा, इस्लाम में ग़ुस्ल (फर्ज़ नहाना) भी जरूरी होता है अगर कोई नापाक हो जाए। अब सवाल उठता है कि क्या रोज़े की हालत में नहाना जायज़ है?

1. गर्मी या थकान दूर करने के लिए नहाना

रोज़े की हालत में ठंडक पाने के लिए नहाना पूरी तरह जायज़ है।

हदीस में आता है कि नबी ﷺ ने गर्मी के दौरान सर पर पानी डालकर ठंडक ली।

इमाम बुखारी ने अपनी सहीह में बयान किया है कि

"अब्दुर्रहमान बिन अबी बक्र ने अपने पिता से बयान किया कि उन्होंने रसूलुल्लाह ﷺ को रोज़े की हालत में अपने सर पर पानी डालते हुए देखा, क्योंकि गर्मी बहुत थी।" (बुखारी: 1930)

2. फर्ज़ ग़ुस्ल (नहाना) करना

अगर किसी पर ग़ुस्ल वाजिब हो जाए (जैसे नापाकी की हालत में), तो रोज़े की हालत में नहाना ज़रूरी है।

अगर कोई ग़ुस्ल किए बिना ही रोज़े में चला जाए, तो उसका रोज़ा सही तो रहेगा, लेकिन उसे जल्द से जल्द ग़ुस्ल कर लेना चाहिए।

3. अगर नहाते वक्त पानी हलक में चला जाए तो?

अगर कोई नहाते वक्त सावधानी नहीं बरतता और पानी गलती से अंदर चला जाता है, तो रोज़ा टूट जाएगा।

इसलिए नहाते समय बहुत सावधानी बरतनी चाहिए कि पानी हलक के अंदर न जाए।

रोज़े के दौरान सावधानियां

कुल्ली या वुज़ू करते वक्त ज्यादा ज़ोर से या गहराई से पानी न खींचें।

नहाते समय पानी पीने या अंदर जाने से बचें।

गर्मी में नहाना जायज़ है, लेकिन इसका रोज़े पर असर न पड़े, इसका ध्यान रखें।

रोज़े में ग़ुस्ल करना ज़रूरी हो तो उसे टालना नहीं चाहिए।

आम गलतफहमियां

1. "क्या कुल्ली करने से रोज़ा कमजोर हो जाता है?"

नहीं, कुल्ली करने से रोज़ा कमजोर नहीं होता, बल्कि वुज़ू और सफाई के लिए यह जरूरी है।

2. "अगर किसी ने नहाते वक्त गलती से पानी पी लिया तो रोज़ा क्या टूट जाएगा?"

हां, अगर पानी हलक में चला गया तो रोज़ा टूट जाएगा और उसकी क़ज़ा करनी होगी।

3. "क्या ठंडक पाने के लिए नहाना रोज़े में कमजोरी ला सकता है?"

नहीं, बल्कि यह शरीर को राहत देता है और रोज़ा अच्छी तरह रखने में मदद करता है।

रोज़े की हालत में कुल्ली करना जायज़ है, लेकिन सावधानी बरतनी चाहिए कि पानी अंदर न जाए।

नहाना भी जायज़ है, चाहे गर्मी की वजह से हो या फर्ज़ ग़ुस्ल की जरूरत से।

अगर पानी गलती से अंदर चला जाए तो फर्ज़ रोज़ा टूट जाएगा और उसकी क़ज़ा करनी होगी।

इस्लाम एक आसान और रहमत वाला धर्म है, इसलिए कोई भी काम लापरवाही से नहीं बल्कि समझदारी और एहतियात से करना चाहिए।

अल्लाह तआला हमें रोज़े के सही आदाब और उसके नियमों को समझने की तौफीक़ दे। आमीन!

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